Salient points of speech of Hon'ble Union Home Minister and Minister of Cooperation Shri Amit Shah on Waqf Bill in Lok Sabha


by Shri Amit Shah -
02-04-2025
Press Release

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 पर चर्चा में हिस्सा लिया

विपक्ष भ्रांति फैला रहा कि यह विधेयक मुस्लिमों के धार्मिक क्रियाकलापों और उनके द्वारा दान की गई संपत्ति में दखल है

माइनॉरिटी समुदाय को डरा कर विपक्ष अपनी वोट बैंक खड़ी करने की कोशिश कर रहा

मुस्लिम भाइयों के धार्मिक क्रियाकलाप और उनके बनाए हुए दान से जुड़े ट्रस्ट यानि वक्फ में सरकार कोई दखल नहीं करना चाहती

 मुतवली, वाकिफ, वक्फ सब मुस्लिम ही होंगे, परन्तु यह जरूर देखा जाएगा कि वक्फ की संपत्ति का रखरखाव ठीक से हो रहा है या नहीं

वक्फ बोर्ड में धार्मिक दान से जुड़े कार्यों में किसी गैर-इस्लामिक सदस्य को जगह नहीं मिलेगी

वक्फ बोर्ड या इसके परिसरों में जिन गैर-मुस्लिम सदस्यों को रखा जाएगा, उनका काम धार्मिक क्रियाकलापों से संबंधित नहीं होगा

चैरिटी कमिश्नर किसी भी धर्म का व्यक्ति बन सकता है, वह सुनिश्चित करेगा कि बोर्ड का संचालन चैरिटी कानून के मुताबिक हो, यह धर्म का नहीं, प्रशासन का काम

वक्फ बोर्ड का काम वक्फ की संपत्तियां बेच खाने वालों को पकड़ कर बाहर निकालने का होना चाहिए

विपक्ष चाहता है उनके राज में चलने वाली मिलीभगत चलती ही रहे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा

2013 में अगर वक्फ कानून में संशोधन नहीं किया गया होता, तो यह विधेयक लाने की नौबत ही नहीं आती

वर्ष 2013 में रातों-रात तुष्टीकरण की खातिर वक्फ कानून को Extreme बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली में लुटियन्स ज़ोन की 123 वीवीआईपी संपत्ति वक्फ को दे दी गई

नरेन्द्र मोदी सरकार का स्पष्ट सिद्धांत है कि वोट बैंक के लिए हम कोई कानून नहीं लाएंगे क्योंकि कानून न्याय और लोगों के कल्याण के लिए होता है

सबको अपने धर्म का अनुसरण करने का अधिकार है, लेकिन लोभ, लालच और भय से धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकता

2013 में लाए गए संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में कुल मिलाकर साढ़े 5 घंटे चर्चा हुई जबकि इस बिल पर दोनों सदनों को मिलाकर 16 घंटे चर्चा हो रही है

हमने संयुक्त समिति बनाई, 38 बैठकें हुईं, 113 घंटे चर्चा हुई और 284 हितधारक बनाए गए और इन सबसे देशभर से लगभग एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव आए जिनकी मीमांसा कर ये कानून बनाया गया और इसे ऐसे खारिज नहीं कर सकते

यह भारत सरकार का कानून है जो सब पर बाध्य है औऱ सभी को इसे स्वीकारना होगा

1913 से 2013 तक वक्फ बोर्ड की कुल भूमि 18 लाख एकड़ थी, जिसमें 2013 से 2025 तक और नई 21 लाख एकड़ भूमि बढ़ गई

लीज़ पर दी गई संपत्तियां 20 हज़ार थीं, लेकिन रिकॉर्ड के हिसाब से 2025 में ये संपत्तियां शून्य हो गईं, ये संपत्तियां बेच दी गईं

यह विधेयक ज़मीन की सुरक्षा प्रदान करेगा, किसी की ज़मीन घोषण मात्र से वक़्फ़ नहीं बनेगी और उसे सुरक्षा मिलेगी

दान तो सिर्फ़ अपनी संपत्ति का ही किया जा सकता है इसीलिए स्वामित्व के बिना वक़्फ़ निजी संपत्ति नहीं ले पाएगा

वक़्फ़ की संपत्ति घोषित करने के अधिकार को समाप्त कर दिया गया है और अब इसे कलेक्टर से सत्यापित करवाना होगा

श्री अमित शाह ने ज़ोर देकर कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में भय पैदा करना एक फ़ैशन बन गया है

राम जन्मभूमि, ट्रिपल तलाक़ और CAA के समय भी मुस्लिम समुदाय के लोगों में भय पैदा करने की कोशिश की गई, लेकिन मुस्लिम समुदाय भी जानता है कि भय की कोई बात नहीं है

दो साल हो गए CAA से किसी की नागरिकता नहीं गई, अगर CAA से किसी की नागरिकता गई है तो विपक्ष उसकी जानकारी सदन के पटल पर रखे

मोदी सरकार का यह संकल्प है कि इस देश के किसी भी नागरिक पर चाहे वह किसी भी धर्म को हो कोई आँच नहीं आएगी

 

नई दिल्ली, 02 अप्रैल 2025 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 पर चर्चा में हिस्सा लिया।

चर्चा में भाग लेते हुए श्री अमित शाह ने कहा कि वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसका इतिहास हदीसों से जुड़ा हुआ है। आजकल जिस अर्थ में इसका प्रयोग किया जाता है, उसका मतलब है अल्लाह के नाम पर संपत्ति का दान या पवित्र धार्मिक उद्देश्यों के लिए संपत्ति का दान। उन्होंने कहा कि वक्फ का समकालीन अर्थ इस्लाम के दूसरे खलीफा श्री ओमर के समय में अस्तित्व में आया। आज की भाषा में वक्फ एक प्रकार का Charitable Endowment  है, जहां कोई व्यक्ति धार्मिक या सामाजिक भलाई के लिए संपत्ति दान करता है। इसमें दान निजी चीज का ही किया जा सकता है। सरकारी संपत्ति या किसी और की संपत्ति का दान नहीं कर सकते।

 

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वक्फ बोर्ड में धार्मिक दान से जुड़े कार्यों में किसी गैर-इस्लामिक सदस्य को जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के संचालन में गैर-मुस्लिम व्यक्ति रखने का प्रावधान नहीं है और हम ऐसे प्रावधान करना भी नहीं चाहते। श्री शाह ने कहा कि विपक्ष भ्रांति फैला रहा है कि यह विधेयक मुस्लिमों के धार्मिक क्रियाकलापों और उनके द्वारा दान की गई संपत्ति में दखल के लिए लाया जा रहा। उन्होंने कहा कि विपक्ष अलसंख्यक  समुदाय को डरा कर अपनी वोट बैंक खड़ी करने की कोशिश कर रहा है।

 

गृह मंत्री ने कहा कि वक्फ बोर्ड या इसके परिसरों में जिन गैर-मुस्लिम सदस्यों को रखा जाएगा, उनका काम धार्मिक क्रियाकलापों से संबंधित नहीं होगा। वे सिर्फ यह सुनिश्चित करेंगे कि दान से संबंधित मामलों का प्रशासन नियम के अनुरूप हो रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि वक्फ भारत में ट्रस्ट की तरह है। ट्रस्ट में ट्रस्टी और एक मैनेजिंग ट्रस्टी होते हैं। वक्फ में वाकिफ और मुतवली होते हैं, जो इस्लाम के अनुयायी होते हैं। श्री शाह ने कहा कि वक्फ शब्द ही इस्लाम से आया है, इसलिए वक्फ वही कर सकता है जो इस्लाम का अनुयायी हो। उन्होंने कहा कि वक्फ धार्मिक चीज है, लेकिन वक्फ बोर्ड या वक्फ परिसर धार्मिक नहीं हैं। कानून के मुताबिक चैरिटी कमिश्नर किसी भी धर्म का व्यक्ति बन सकता है, क्योंकि उसे ट्रस्ट नहीं चलाना। उसे यह सुनिश्चित करना है कि चैरिटी कानून के हिसाब से बोर्ड का संचालन हो। श्री शाह ने कहा कि यह धर्म का नहीं, प्रशासन का काम है।

 

श्री अमित शाह ने कहा कि वक्फ बोर्ड का काम वक्फ की संपत्तियां बेच खाने वालों को पकड़ कर बाहर निकालने का होना चाहिए। उसे ऐसे लोगों को पकड़ना चाहिए जिन्होंने वक्फ के नाम पर औने-पौने दाम में संपत्तियों को सौ-सौ साल तक किराए पर दे रखा है। उन्होंने कहा कि वक्फ की आय कम होती जा रही है, जबकि वक्फ के पैसे से अल्पसंख्यक समुदाय का विकास होना चाहिए और इस्लाम धर्म की संस्थाओं को पुख्ता किया जाना चाहिए। इस पैसे की चोरी पर रोक लगाना ही वक्फ बोर्ड और उसके परिसर का काम होगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है उनके राज में चलने वाली मिलीभगत चलती ही रहे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अगर 2013 में वक्फ कानून में संशोधन नहीं किया गया होता, तो इस विधेयक को लाने की नौबत ही नहीं आती। लेकिन 2014 में चुनाव से पहले 2013 में रातों-रात तुष्टीकरण की खातिर वक्फ कानून को Extreme बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली में लुटियन्स ज़ोन की 123 वीवीआईपी संपत्ति वक्फ को दे दी गई। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने उत्तरी रेलवे की भूमि वक्फ के नाम कर दी। वहीं, हिमाचल प्रदेश में वक्फ की संपत्ति बता कर उस जमीन पर अवैध मस्जिद बनाने का काम किया गया। तमिलनाडु के 1500 साल पुराने  तिरुचेंदूर मंदिर की 400 एकड़ भूमि को वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया गया। श्री शाह ने कहा कि कर्नाटक की एक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 29,000 एकड़ वक्फ भूमि व्यावसायिक उपयोग के लिए किराए पर दे दी गई। वर्ष 2001 से 2012 के बीच 2 लाख करोड़ रुपए मूल्य की वक्फ संपत्ति निजी संस्थानों को 100 साल की लीज पर सौंप दी गई। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु में उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाड़ 602 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को रोका गया। विजयपुर, कर्नाटक के होनवाड़ गांव की 1500 एकड़ भूमि को विवादित बनाकर 500 करोड़ रुपए मूल्य की इस जमीन को फाइव-स्टार होटल को मात्र 12,000 रुपए प्रति माह के किराए पर दे दिया गया।

 

श्री अमित शाह ने कहा कि यह सारा पैसा गरीब मुसलमानों के कल्याण के लिए है, न कि धनकुबेरों की लूट के लिए। कर्नाटक में दत्तापीठ मंदिर पर दावा किया गया। तालीपरंबा में 75 साल पुराने एक दावे के आधार पर 600 एकड़ भूमि पर कब्जे की कोशिश की गई। ईसाई समुदाय की संपत्तियों पर भी कब्जा किया गया। उन्होंने कहा कि देश के कई चर्चों ने वक्फ बिल का विरोध किया है, क्योंकि वे इसे मुस्लिम समुदाय की सहानुभूति जीतने का जरिया मानते हैं। लेकिन चार साल में मुस्लिम भाइयों को भी पता चल जाएगा कि यह विधेयक तो उनके फायदे का है।

 

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि तेलंगाना में 66 हजार करोड़ रुपए की 1700 एकड़ जमीन पर दावा कर दिया, वहीं असम में मोरीगांव जिले की 134 एकड़ भूमि पर दावा किया गया। गुरुद्वारे से संबंधित हरियाणा की चौदह मरला भूमि को वक्फ को सौंप दिया और प्रयागराज में चंद्रशेखर आजाद पार्क को भी वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया। महाराष्ट्र के वडांगे गांव में महादेव के मंदिर पर दावा किया और बीड में कंकलेश्वर की 12 एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड ने जबरन ले ली।

 

श्री अमित शाह ने कहा कि मुस्लिम भाइयों के धार्मिक क्रियाकलाप और उनके बनाए हुए दान से जुड़े ट्रस्ट यानि वक्फ में सरकार कोई दखल नहीं करना चाहती। मुतवली, वाकिफ, वक्फ सब उनके ही होंगे, परन्तु यह जरूर देखा जाएगा कि वक्फ की संपत्ति का रखरखाव ठीक से हो रहा है या नहीं। वक्फ का संचालन कानून के हिसाब से हो रहा है या निजी उपयोग के हिसाब से हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि सैकड़ों साल पहले किसी बादशाह की दान की गई संपत्ति को 12 हजार रुपए के मासिक किराये पर पांच सितारा होटल बनाने के लिए देना कहाँ तक उचित है। वह पैसा गरीब मुसलमानों, तलाकशुदा महिलाओं, अनाथ बच्चों, बेरोजगार मुसलमानों के भलाई और उन्हें हुनरमंद बनाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वक्फ के पास लाखों करोड़ों रुपए की भूमि है, लेकिन आय सिर्फ 126 करोड़ रुपए है।

 

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब 2013 का संशोधन विधेयक पेश किया था, उस समय सरकार में रहे वरिष्ठ नेताओं ने वक्फ की संपत्ति की लूट-खसोट रोकने के लिए कड़े कानून बनाने और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की वकालत की थी। श्री शाह ने कहा कि मौजूदा विधेयक से पारदर्शी ऑडिट हो सकेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने अपने संशोधन में लिखा था कि वक्फ बोर्ड के ऑडर को कोर्ट में चैलेंज नहीं कर सकते, लेकिन सच यह है कि इसे अदालत में चुनौती देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक retrospective effect से लागू नहीं होगा लेकिन विपक्ष द्वारा मुस्लिमों को डराया जा रहा है।

 

श्री अमित शाह ने वक्फ से जुड़े विधेयक में जिला कलेक्टर की भूमिका पर कहा कि देश में जब किसी मंदिर के लिए जमीन खरीदनी होती है तो कलेक्टर ही यह तय  करता है कि जमीन का मालिकाना हक किसके पास है। उन्होंने कहा कि  फिर वक्फ की भूमि की जांच कलेक्टर द्वारा किए जाने पर आपत्ति क्यों है? गृह मंत्री ने कहा कि वक्फ की भूमि सरकारी है या नहीं, इसे कलेक्टर ही सत्यापित कर सकता है।

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार का स्पष्ट सिद्धांत है कि वोट बैंक के लिए हम कोई कानून नहीं लाएंगे क्योंकि कानून न्याय और लोगों के कल्याण के लिए होता है। इसी सदन में मोदी सरकार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का कानून लाई और पिछड़ों को संवैधानिक अधिकार दिया गया। उन्होंने कहा कि सबको अपने धर्म का अनुसरण करने का अधिकार है, लेकिन लोभ, लालच और भय से धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकता।

 

श्री अमित शाह ने कहा कि 2013 में लाए गए संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में कुल मिलाकर साढ़े 5 घंटे चर्चा हुई जबकि इस बिल पर दोनों सदनों को मिलाकर 16 घंटे चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि हमने संयुक्त समिति बनाई, 38 बैठकें हुईं, 113 घंटे चर्चा हुई और 284 हितधारक बनाए गए। इन सबसे देशभर से लगभग एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव आए जिनकी मीमांसा कर यह कानून बनाया गया और इसे ऐसे खारिज नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि सदन में हर सदस्य बोलने के लिए स्वतंत्र है यहाँ किसी एक परिवार की नहीं चलती है। सांसद जनता के नुमाइंदे हैं, किसी की कृपा से नहीं आए हैं और वे जनता की आवाज़ को रखेंगे।

 

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह देश की संसद द्वारा बनाया गया कानून है जिसे सबको स्वीकारना पड़ेगा। यह भारत सरकार का कानून है जो सब पर बाध्य है औऱ सभी को इसे स्वीकारना होगा। उन्होंने कहा कि 1913 से 2013 तक वक्फ बोर्ड की कुल भूमि 18 लाख एकड़ थी, जिसमें 2013 से 2025 के बीच 21 लाख एकड़ भूमि और बढ़ गई। इस 39 लाख एकड़ भूमि में 21 लाख एकड़ भूमि 2013 के बाद की है। श्री शाह ने कहा कि लीज़ पर दी गई संपत्तियां 20 हज़ार थीं, लेकिन रिकॉर्ड के हिसाब से 2025 में ये संपत्तियां शून्य हो गईं। उन्होंने कहा कि ये संपत्तियां बेच दी गईं। गृह मंत्री ने कहा कि कैथौलिक और चर्च संगठनों ने इस कानून को अपना समर्थन दिया है और 2013 के संशोधन को अन्यायी बताया है।

 

श्री अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक ज़मीन की सुरक्षा प्रदान करेगा, किसी की ज़मीन घोषण मात्र से वक़्फ़ नहीं बनेगी और उसे सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ज़मीन को सुरक्षा देंगे और शेड्यूल 5 और 6 के अनुसार आदिवासियों की ज़मीन सुरक्षित हो जाएगी। इसके साथ ही आम नागरिक की निजी संपत्ति भी सुरक्षित हो जाएगी। श्री शाह ने कहा कि दान तो सिर्फ़ अपनी संपत्ति का ही किया जा सकता है इसीलिए स्वामित्व के बिना वक़्फ़ निजी संपत्ति नहीं ले पाएगा। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता लाने के लिए वक़्फ़ अधिनियम में सूचना देने की प्रक्रिया को शामिल किया गया है।

 

गृह मंत्री ने कहा कि वक़्फ़ की संपत्ति घोषित करने के अधिकार को समाप्त कर दिया गया है और अब इसे कलेक्टर से सत्यापित करवाना होगा। इसके साथ ही नए वक़्फ़ का पारदर्शी तरीक़े से पंजीकरण भी करवाना होगा। उन्होंने कहा कि अब मुस्लिम भी वक़्फ़ ट्रस्ट एक्ट के अंतर्गत अपना ट्रस्ट रजिस्टर करवा सकते हैं। श्री शाह ने कहा कि इसके लिए वक़्फ़ क़ानून ज़रूरी नहीं है।

 

केन्द्रीय गृह मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में भय पैदा करना का फ़ैशन बन गया है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर, ट्रिपल तलाक़ और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के समय भी मुस्लिम समुदाय के लोगों में भय पैदा करने की कोशिश की गई, लेकिन मुस्लिम समुदाय भी जानता है कि भय की कोई बात नहीं थी। गृह मंत्री ने कहा विपक्ष कहता था कि CAA से मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी लेकिन दो साल हो गए किसी की नागरिकता नहीं गई। उन्होंने विपक्ष से कहा कि अगर CAA से किसी की नागरिकता गई है तो वह उसकी जानकारी सदन के पटल पर रखे। श्री शाह ने कहा कि धारा 370 हटाने पर भी मुसलमानों को डराने का प्रयास किया गया लेकिन आज वहाँ एक निर्वाचित सरकार है, आतंकवाद समाप्त हो गया, विकास शुरू हो गया और पर्यटन बढ़ गया।

 

श्री अमित शाह ने कहा विपक्षी पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने मुसलमान भाइयों को डरा -डरा कर अपनी वोटबैंक खड़ी करने का काम किया है। गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार का यह संकल्प है कि इस देश के किसी भी नागरिक को चाहे वह किसी भी धर्म को हो कोई आँच नहीं आएगी।

To Write Comment Please Login